Wednesday, 30 October 2013

                            social media unsocial people .......



सूचना क्रांति ने पुरे  विश्व  एक गावं में बदल दिया है। सूचना तंत्र के इस जाल ने खासकर इन्टरनेट हमारे जीने के तरीको में मनो एक नयी क्रांति ला दी हो। देश दुनिया में हो रहे परिवर्तन या नए आयामों से हम इन्टरनेट के माध्यम से रूबरू होते है। इन्टरनेट आधारित सोशल नेटवर्किंग साइट्स ( फेसबुक ट्विटर गूगल ) जहा हमें अपनो से दूर लोगो के साथ इंटरेक्शन करने का मौका देती है , वही आम इन्सान को सहभागी होने का अवसर भी देती है ।  सोशल नेटवर्किंग साइट्स अन्य जन माध्यमो के तुलना में कही ज्यादा ही प्रभावशाली है ,……. हो  भी न क्यों आखिर बात सहभागिता की जो है ?
       
   वर्तमान में  किसी भी लोकतान्त्रिक देश में आम आदमी का जो सबसे अहम् एवं प्रभावशाली हथियार है वो है सोशल नेटवर्किंग साइट्स।  पर आज हम इस हथियार को किस रूप में प्रयोग कर रहे है यह एक बड़ा प्रश्न है।  वास्तव में क्या हम ऐसे साइट्स को सोशल तरीके से प्रयोग कर रहे है ? संभवतः अगर इस पर सर्वे करे तो पाएंगे की अधिकतर लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अनसोशल हरकत करते है।  वाणी एवं अभिव्यक्ति के नाम पर लोग अक्सर मनमानी करते है।  इसका उदहारण ऐसे साइट्स पर देखे जा सकते है।  समाज में बढ़ रहे अपराध , भ्रष्टाचार, महंगाई  इत्यादि ऐसे कई सामाजिक समस्याएँ है जिसके लिए हम सरकार को जिम्मेवार ठहराते है और कड़ी आलोचना करते है।  पर जिस तरह से हम रोष व्यक्त करते है क्या वो एक सोशल समाज को सोभा देती है ? देश के राजनेताओ के आपत्ति जनक फोटो एवं विडियो जिस तरह इन साइट्स पर देखे जाते है , उससे न केवल उनके सम्मान पर आंच आती है , वल्कि हमारे देश की छवि  भी अंतरराष्ट्रीय  स्तर पर  धूमिल होती है।  गाली - गलौज , अश्लीलता , हिन्स्सा इत्यादि ऐसे अनेक असामाजिक हरकत दिन प्रतिदिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बढ़ रहें है , जो समाज के लिए चुनौती बनती जा रही।
 
 सोशल  नेटवर्किंग का  सबसे भयानक प्रभाव  जिस के  उपर देखने को  को मिलता है  वो है बच्चे व टीन एजर्स।  सोशल नेटवर्किंग से हमेशा जुड़े रहने से न केवल बच्चो का बेवजह समय बर्बाद होता है बल्कि तमाम अश्लील हरकतो का भी प्रभाव उनके ऊपर देखा जाता है।  जिस तरह सोशल नेवर्किंग साइट्स पर पोर्नोग्राफी व ऐसे  कई दूसरे  अश्लील हरकतो को बढ़ावा मिल रहा है , उससे बच्चो में विकृति कि धारणा तेजी से घर कर  रही है। हलाकि ऐसे हरकतो  को किसको जिम्मेदार ठहराया जाये ये भी कुछ कहा नहीं जा सकता क्योकि इसके लिए वो भी जिम्मेदार है , जो बेमतलब का अपने बच्चो को सब कुछ करने कि आजादी दे दी है , साथ ही वो लोग भी है जो अभी भी अपने बच्चो को आजादी से रहने नहीं देते।  अगर हम  बच्चो को छोड़ एक मिनट के लिए उनके बड़ो के बारे में सोचे तो कही न कही ऐसे साइट्स पर अनैतिक व अश्लील हरकत  कई बार वो  इसलिए करते है क्योकि उनके बड़े भी ऐसा करते है।

 आज सोशल नेटवर्किंग साइट्स को सहारा बना कर लोग सामाजिक दंगे व कभी - कभी देश के अंदर द्वेष कि भावना को तुल  देते है।  उलटा सीधा फ़ोटो अपलोड कर एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ गलत बताना तथा एक समुदाय के लोगो को दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काना आज कल सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आम बात हो गायी है।  लोग इसके महत्व्  व इसके अच्छाई को भूल गलत चीजो को तेजी से बढ़ावा दे रहे है जो कि न केवल एक समाज , एक देश बल्कि पूरे  विश्व के सामने चुनौती बनती जा रही है 

No comments:

Post a Comment